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भारत-ईयू FTA पर बड़ी हलचल: उर्सुला वॉन डेर लेयन दिल्ली में, 27 जनवरी को शिखर सम्मेलन में ऐलान की उम्मीद

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन नई दिल्ली पहुंची हैं और 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि रहेंगी। 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बड़ा एलान होने की संभावना जताई जा रही है।

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व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
PUBLISHED

नई दिल्ली में भारत-यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों को लेकर अगले 48 घंटों में बड़ी राजनीतिक-आर्थिक गतिविधि दिख रही है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन शनिवार को भारत पहुंचीं और 26 जनवरी 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ मुख्य अतिथि रहेंगी। यह संकेत माना जा रहा है कि दोनों पक्ष रणनीतिक साझेदारी को अगले चरण में ले जाने की तैयारी में हैं।

भारत-ईयू FTA पर बड़ी हलचल: उर्सुला वॉन डेर लेयन दिल्ली में, 27 जनवरी को शिखर सम्मेलन में ऐलान की उम्मीद
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इस दौरे का केंद्र बिंदु 27 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाला 16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी मंच पर लंबे समय से लंबित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में अहम घोषणा होने की उम्मीद है। वॉन डेर लेयन ने भारत रवाना होने से पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया था कि समझौता “अंतिम रूप देने के करीब” है—जिससे चर्चाएं और तेज हो गईं।

समझौता अगर घोषित होता है, तो आगे इसे औपचारिक रूप से लागू कराने की प्रक्रिया भी लंबी हो सकती है। लेख में कहा गया है कि डील के बाद यूरोपीय संसद की मंजूरी जरूरी होगी, जिसमें कम-से-कम एक साल लग सकता है। यानी 27 जनवरी को संभावित घोषणा को ‘तुरंत लागू’ मानने के बजाय इसे एक बड़े राजनीतिक संकेत और बातचीत के निर्णायक मोड़ की तरह देखना होगा।

व्यापार के लिहाज से दोनों पक्षों के हित स्पष्ट हैं। रिपोर्ट में दावा है कि डील लागू होने पर द्विपक्षीय व्यापार बढ़ सकता है और भारतीय निर्यातकों को—खासकर कपड़ा और आभूषण जैसे क्षेत्रों में—नई राहत मिल सकती है। इसी संदर्भ में यह भी उल्लेख है कि यूरोपीय संघ के औसत टैरिफ 3.8% बताए गए हैं, जबकि कुछ श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर करीब 10% तक शुल्क का असर रहता है, इसलिए टैरिफ कटौती भारत की प्राथमिकता रही है।

यूरोपीय संघ की नजर से यह समझौता सप्लाई चेन का विविधीकरण करने और चीन पर निर्भरता घटाने के व्यापक प्रयासों से भी जुड़ा बताया गया है। वहीं भारत की तरफ से सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही (mobility) से जुड़ी अपेक्षाएं भी बातचीत का अहम हिस्सा मानी जा रही हैं।

अब सबकी निगाहें 26 जनवरी के समारोह और 27 जनवरी के शिखर सम्मेलन पर हैं। अगर FTA पर औपचारिक घोषणा होती है, तो यह 2026 की शुरुआत में भारत की व्यापार-कूटनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में गिनी जा सकती है—हालांकि असली असर लागू होने की शर्तों, टैरिफ शेड्यूल और यूरोपीय संसद की मंजूरी की समय-सीमा पर निर्भर करेगा।

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