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कश्मीर में ताजा बर्फबारी से NH-44 पर संकट, श्रीनगर-जम्मू हाईवे तीसरे दिन भी बाधित; बहाली की कोशिशें जारी

कश्मीर में ताजा बर्फबारी के चलते श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर यातायात लगातार तीसरे दिन प्रभावित रहा। कई हिस्सों में बर्फ हटाने और फिसलन कम करने के लिए एजेंसियां तैनात हैं, जबकि फंसे यात्रियों और जरूरी आपूर्ति को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई जा रही है।

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व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
PUBLISHED

कश्मीर घाटी में रविवार, 25 जनवरी 2026 को ताजा बर्फबारी ने एक बार फिर आवाजाही की रफ्तार धीमी कर दी। मौसम के बिगड़े मिजाज का सबसे बड़ा असर श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर दिखा, जो कई इलाकों में फिसलन और जमाव के कारण लगातार तीसरे दिन बाधित रहा। प्रशासन का कहना है कि सड़क पर जमा बर्फ हटाने, संवेदनशील मोड़ों पर ग्रिटिंग करने और जोखिम वाले हिस्सों में सुरक्षा बैरिकेडिंग जैसी गतिविधियां लगातार जारी हैं।

कश्मीर में ताजा बर्फबारी से NH-44 पर संकट, श्रीनगर-जम्मू हाईवे तीसरे दिन भी बाधित; बहाली की कोशिशें जारी
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स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार को भारी हिमपात के बाद से ही हाईवे पर सैकड़ों वाहन अलग-अलग पॉइंट्स पर फंस गए थे। 270 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर फंसे यात्रियों के लिए चुनौती सिर्फ रुकावट नहीं, बल्कि ठंड और सीमित सुविधाएं भी हैं। राहत के तौर पर, मार्ग को चरणबद्ध ढंग से खोलने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि सबसे पहले फंसे हुए वाहनों को निकाला जा सके और जरूरी सेवाओं की आवाजाही बहाल हो।

क्यों बार-बार रुक रहा है हाईवे

NH-44 कई ऐसे हिस्सों से गुजरता है जहां ढलान तेज है और तापमान गिरते ही ब्लैक-आइस का खतरा बढ़ जाता है। ताजा बर्फबारी होने पर बर्फ हटाने का काम शुरू तो हो जाता है, लेकिन यदि उसी दौरान फिर हिमपात हो जाए, तो साफ किए गए हिस्से भी जल्दी दोबारा ढक जाते हैं। ऐसे में प्रशासन को सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रैफिक रोकना पड़ता है, ताकि फिसलन के कारण दुर्घटनाएं न हों और जाम की स्थिति बिगड़े नहीं।

एक अलग अपडेट में यह भी बताया गया कि कुछ समय बाद मार्ग को आंशिक रूप से बहाल करने की दिशा में कदम उठाए गए, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में वक्त लग सकता है। मौसम की अनिश्चितता के कारण यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे पुष्टि किए बिना यात्रा न करें और आधिकारिक ट्रैफिक एडवाइजरी पर नजर रखें।

यात्रियों के लिए व्यावहारिक सलाह

  • यात्रा से पहले NH-44 की स्थिति और ट्रैफिक एडवाइजरी की पुष्टि करें।
  • जरूरी होने पर ही पहाड़ी रूट पर निकलें; पर्याप्त गर्म कपड़े, पानी और बेसिक दवाएं साथ रखें।
  • यदि वाहन फंस जाए तो अनावश्यक रूप से जोखिम वाले हिस्सों में न उतरें और स्थानीय निर्देशों का पालन करें।
  • इमरजेंसी सेवाओं को रास्ता देने के लिए हाईवे पर अनुशासन बनाए रखें।

कुल मिलाकर, ताजा बर्फबारी ने एक बार फिर साबित किया है कि सर्दियों में कश्मीर का यह मुख्य सड़क-मार्ग जितना जरूरी है, उतना ही संवेदनशील भी। अगले कुछ घंटों में मौसम और बहाली कार्यों की गति तय करेगी कि NH-44 पर यातायात कब तक सामान्य हो पाता है।

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