मुख्य सामग्री पर जाएं
PUBLICATION://in-news-6EDITION::INDIA
व्यापार जगत

बाज़ार, कारोबार और आपकी अर्थव्यवस्था

QUERY
FILE://latest/latest-2026-01-26-2026-47-26
[ताज़ा खबरें]

गणतंत्र दिवस 2026: बस्तर के 47 गांवों में पहली बार 26 जनवरी को फहराया गया तिरंगा

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में नक्सल हिंसा से लंबे समय तक प्रभावित रहे इलाकों के 47 गांवों में इस बार 26 जनवरी को पहली बार तिरंगा फहराया गया। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच गांवों में सार्वजनिक तौर पर राष्ट्रीय पर्व मनाए जाने को लोकतांत्रिक भागीदारी और सामान्य स्थिति की ओर लौटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

BYLINE
व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
PUBLISHED

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में 26 जनवरी 2026 का गणतंत्र दिवस इस बार कई मायनों में अलग रहा। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के ऐसे 47 गांवों में पहली बार सार्वजनिक रूप से तिरंगा फहराया गया, जहां दशकों तक नक्सल हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण राष्ट्रीय पर्व का आयोजन करना मुश्किल माना जाता था। यह पहली बार हुआ जब इन गांवों में 26 जनवरी को ‘गणतंत्र दिवस’ एक सामूहिक कार्यक्रम की तरह मनाया गया।

गणतंत्र दिवस 2026: बस्तर के 47 गांवों में पहली बार 26 जनवरी को फहराया गया तिरंगा
संबंधित चित्र

इन गांवों में तिरंगा फहराने की खबर ने इसलिए भी ध्यान खींचा, क्योंकि बस्तर का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक ऐसे इलाकों में गिना जाता रहा है जहां प्रशासन की पहुंच सीमित, और सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन जोखिम भरा माना जाता था। गांवों में ध्वजारोहण और समारोह होने का मतलब केवल प्रतीकात्मक उत्सव नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि स्थानीय समुदाय अब खुलकर लोकतांत्रिक आयोजनों में भाग ले पा रहा है।

स्थानीय स्तर पर इसे ‘लोकतंत्र की नई सुबह’ के रूप में पेश किया गया, क्योंकि सार्वजनिक ध्वजारोहण के साथ-साथ लोगों की भागीदारी भी सामने आई। कई जगहों पर गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और पहली बार राष्ट्रीय पर्व के दिन सामूहिक रूप से जुटने का अवसर मिला।

ऐसे आयोजन आम तौर पर सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन के समन्वय और समुदाय के भरोसे पर टिके होते हैं। यही वजह है कि 47 गांवों में यह आयोजन होना एक ‘एक दिन का इवेंट’ नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया का नतीजा माना जा रहा है जिसमें इलाके में सामान्य स्थिति लौटाने की कोशिशें की जाती हैं।

गणतंत्र दिवस 2026 के संदर्भ में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में सामने आई है जब देश भर में लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक भागीदारी और शासन की पहुंच पर लगातार चर्चा होती रहती है। बस्तर के इन गांवों में तिरंगा फहरना इसी व्यापक संदर्भ में ‘भागीदारी’ और ‘पहचान’ के भाव को मजबूत करता दिखा।

आगे की चुनौती यह होगी कि यह बदलाव स्थायी बने, ताकि आने वाले वर्षों में भी गांव बिना डर और दबाव के राष्ट्रीय पर्वों को सार्वजनिक रूप से मना सकें। स्थानीय लोगों के लिए यह दिन एक नई शुरुआत की तरह है—जहां ‘राष्ट्र’ अब दूर की अवधारणा नहीं, बल्कि गांव के चौक और स्कूल के मैदान में मौजूद वास्तविक अनुभव बनता जा रहा है।

SOURCE_REGISTRY

  1. Moneycontrol HindiMoneycontrol Hindi