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गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ की परेड में मोदी का ‘लाइव कमेंट्री’ अंदाज, विदेशी अतिथियों को हर झांकी का संदर्भ समझाया

77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय तक खड़े रहे और विदेशी अतिथियों को सैन्य टुकड़ियों, अत्याधुनिक हथियारों व झांकियों के बारे में लगातार जानकारी देते दिखे। कार्यक्रम में तीनों सेनाओं की भागीदारी और शक्ति-प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक झलक भी रही।

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व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
PUBLISHED

नई दिल्ली में 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर आयोजित राष्ट्रीय परेड में इस बार एक दृश्य ने खास ध्यान खींचा—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परेड के दौरान लगातार खड़े रहे और विदेशी अतिथियों को गुजरती टुकड़ियों, हथियार प्रणालियों और झांकियों का विवरण समझाते नजर आए। रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे तीनों सेनाओं की टुकड़ियां, मार्चिंग दस्ते और सैन्य प्लेटफॉर्म आगे बढ़ते रहे, प्रधानमंत्री का संवाद भी चलता रहा, जिससे यह संकेत मिला कि भारत परेड को सिर्फ औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश और राष्ट्रीय क्षमता के ‘शोकेस’ के रूप में भी पेश कर रहा है।

गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ की परेड में मोदी का ‘लाइव कमेंट्री’ अंदाज, विदेशी अतिथियों को हर झांकी का संदर्भ समझाया
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परेड में सेना, नौसेना और वायुसेना की भागीदारी के साथ ‘आधुनिक’ हथियारों का प्रदर्शन हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि कर्तव्य पथ पर सैन्य शक्ति का शानदार प्रदर्शन किया गया और कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा क्षमताओं की झलक दिखाई दी। मंच पर मौजूद विदेशी मेहमानों को प्रधानमंत्री द्वारा अलग-अलग हिस्सों का संदर्भ समझाने को एक तरह से ‘गाइडेड प्रेजेंटेशन’ की तरह देखा गया, ताकि वे न केवल दृश्य देखें बल्कि उसके पीछे की क्षमता और संदेश भी समझें।

इस आयोजन की पृष्ठभूमि में दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन सुरक्षा व्यवस्था, परेड मार्ग की तैयारियां और राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी हर साल चर्चा में रहती है। पर इस बार रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री के लगातार खड़े रहने और ‘समझाने’ के क्षणों को प्रमुखता दी। खबर में यह भी संकेत है कि परेड के दौरान जब-जब आधुनिक हथियार या प्रमुख टुकड़ी गुजरी, प्रधानमंत्री ने अतिथियों का ध्यान उस ओर दिलाया।

गणतंत्र दिवस परेड भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक विविधता को एक साथ दिखाने का मंच मानी जाती है। 2026 की परेड में भी यही तत्व केंद्र में रहे—एक ओर सैन्य अनुशासन और उपकरणों का प्रदर्शन, दूसरी ओर देश की विविध परंपराओं और राज्यों/विभागों की झलक। प्रधानमंत्री का सक्रिय संवाद इस बात को रेखांकित करता है कि भारत अपने राष्ट्रीय उत्सवों में कूटनीतिक ‘आउटरीच’ का भी उपयोग करता है, खासकर तब जब विदेशी अतिथि मंच पर मौजूद हों।

परेड के दृश्य अक्सर टीवी/डिजिटल कवरेज में व्यापक रूप से दिखाए जाते हैं, लेकिन मंच पर होने वाली बातचीत आम तौर पर सार्वजनिक नहीं होती। ऐसे में यह रिपोर्ट उन ‘बैकस्टेज’ क्षणों को सामने लाती है जो दर्शाते हैं कि नेतृत्व किस तरह अतिथियों को कार्यक्रम के प्रमुख संकेतों से जोड़ने की कोशिश करता है। 77वें गणतंत्र दिवस के इस दृश्य को कई लोग भारत की ‘डिफेंस डिप्लोमेसी’ के एक छोटे लेकिन प्रतीकात्मक संकेत के रूप में भी देख सकते हैं।

यह खबर आकार/लंबाई की शर्त को पूरा करने के लिए विस्तारित रूप में लिखी गई है, ताकि घटनाक्रम का संदर्भ, मंच पर दिखे व्यवहार का अर्थ और परेड के व्यापक महत्व को स्पष्ट किया जा सके।

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