अमेरिका दौरे की तैयारी: फरवरी में ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ बैठक के लिए जयशंकर को वॉशिंगटन आमंत्रण
विदेश मंत्री एस. जयशंकर को 4-5 फरवरी 2026 के लिए वॉशिंगटन में ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ पर मंत्रीस्तरीय बैठक में आमंत्रित किया गया है। संभावित तौर पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात भी हो सकती है।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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भारत-अमेरिका संबंधों के अहम आर्थिक और रणनीतिक हिस्से—खासकर ‘क्रिटिकल मिनरल्स’—पर आने वाले दिनों में बड़ा फोकस दिख सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर को वॉशिंगटन डीसी में 4-5 फरवरी 2026 को होने वाली ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ संबंधी मंत्रीस्तरीय बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है। यह बैठक वैश्विक सप्लाई चेन, तकनीकी उत्पादन और ऊर्जा परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, यह यात्रा अभी प्रस्ताव/निर्णय की प्रक्रिया में हो सकती है, लेकिन यदि दौरा होता है तो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बातचीत की संभावना भी जताई गई है। हाल के समय में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक सहयोग पर बातचीत के संकेत लगातार मिलते रहे हैं, और ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ उसी का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है।
क्रिटिकल मिनरल्स में दुर्लभ पृथ्वी तत्व (rare earths) सहित वे खनिज शामिल होते हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बैटरी, रिन्यूएबल एनर्जी और रक्षा प्रणालियों में जरूरी हैं। आपूर्ति के स्रोत सीमित होने, भू-राजनीतिक निर्भरता और प्रोसेसिंग क्षमता के कुछ देशों में केंद्रित होने के कारण कई अर्थव्यवस्थाएं सप्लाई चेन को ‘रिज़िलिएंट’ बनाने की दिशा में साझेदारी बढ़ा रही हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग की सार्वजनिक पोस्ट के अनुसार, बैठक का जोर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने पर रहेगा—जिसे आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी नेतृत्व और ऊर्जा भविष्य से भी जोड़ा जा रहा है। भारत के लिए यह चर्चा घरेलू विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा संक्रमण और रणनीतिक स्वायत्तता जैसे लक्ष्यों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
क्यों अहम है यह बैठक
- इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन सुरक्षित करना
- कच्चे माल के साथ-साथ प्रोसेसिंग/रिफाइनिंग क्षमता पर सहयोग
- भारत-अमेरिका व्यापार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर
- इंडो-पैसिफिक और व्यापक रणनीतिक साझेदारियों में तालमेल
यदि जयशंकर का यह दौरा अंतिम रूप लेता है, तो फरवरी के पहले सप्ताह में वॉशिंगटन में होने वाली बातचीत भारत-अमेरिका के आर्थिक-सुरक्षा एजेंडे को और स्पष्ट दिशा दे सकती है—खासकर ऐसे दौर में जब तकनीकी आपूर्ति शृंखलाएं और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुकी हैं।