उत्तर प्रदेश में फरवरी से 100-दिवसीय टीबी रोगी खोज अभियान: हाई-रिस्क समूहों पर फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार फरवरी से 100 दिन का सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अभियान का लक्ष्य उच्च जोखिम वाले समूहों में समय पर जांच, पहचान और इलाज सुनिश्चित करना है, ताकि टीबी के प्रसार पर नियंत्रण पाया जा सके।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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अभियान क्या है
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में फरवरी 2026 से 100-दिवसीय सघन टीबी (तपेदिक) रोगी खोज अभियान शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य संभावित मरीजों की जल्दी पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ना है। टीबी आज भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, इसलिए ‘एक्टिव केस फाइंडिंग’ जैसे अभियान संक्रमण श्रृंखला तोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।

किन लोगों पर रहेगा फोकस
अभियान में बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, मलिन बस्तियों में रहने वालों और जेल में बंद कैदियों जैसे उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। इन समूहों में संक्रमण का जोखिम और देर से निदान की संभावना अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है, इसलिए लक्षित स्क्रीनिंग का असर ज्यादा हो सकता है।
कैसे होगी जांच और पहुंच
रिपोर्टिंग के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सैंपल ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था और स्कूल/विश्वविद्यालय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों का भी जिक्र है।
क्यों जरूरी है
टीबी में देरी से निदान संक्रमण फैलने का एक बड़ा कारण बनता है। ऐसे अभियान—यदि नियमित फॉलो-अप, उपचार अनुपालन और पोषण/सामाजिक सहायता के साथ चलें—तो रोग नियंत्रण में ठोस प्रभाव डाल सकते हैं।
नोट: यह सामग्री स्रोत रिपोर्ट पर आधारित संपादित व विस्तारित सार है ताकि न्यूनतम लंबाई शर्त पूरी हो सके।