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[स्वास्थ्य]

महिला स्वास्थ्य पर चिंता: इलाज में पीछे, समय से पहले मेनोपॉज के संकेत; बढ़ते जोखिमों पर चेतावनी

एक रिपोर्ट में महिलाओं के स्वास्थ्य, इलाज तक पहुंच और समय से पहले रजोनिवृत्ति (प्रीमैच्योर मेनोपॉज) को बढ़ती चिंता बताया गया है। अध्ययन के हवाले से कहा गया कि कम उम्र में मेनोपॉज से हृदय, हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।

BYLINE
व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
PUBLISHED

नई दिल्ली: महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर चिंता सामने रखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीमारियों का इलाज कराने और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के मामले में महिलाएं अब भी पीछे हैं। इसी बीच, समय से पहले रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के संकेत भी बढ़ते दिख रहे हैं, जो आगे चलकर कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकते हैं।

महिला स्वास्थ्य पर चिंता: इलाज में पीछे, समय से पहले मेनोपॉज के संकेत; बढ़ते जोखिमों पर चेतावनी
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रिपोर्ट में एक अध्ययन के हवाले से कहा गया कि पिछले दशकों की तुलना में महिलाओं में समय से पहले मेनोपॉज अधिक देखने को मिल रहा है। यह बदलाव सिर्फ प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर पर असर डाल सकता है। सामान्य तौर पर मेनोपॉज की उम्र 50 के आसपास मानी जाती रही है, लेकिन कम उम्र में होने वाली रजोनिवृत्ति को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से सतर्कता की बात करते रहे हैं।

कम उम्र में मेनोपॉज होने से हार्मोनल बदलाव पहले शुरू हो जाते हैं और इसके प्रभाव कई स्तरों पर दिख सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि इससे हृदय स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डियों का कमजोर होना, मूड डिसऑर्डर और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क जैसे पहलू अक्सर इस चर्चा में आते हैं।

रिपोर्ट में इस बदलाव के पीछे संभावित पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़ी वजहों की भी चर्चा की गई है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी, पोषण असंतुलन, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ मामलों में प्रदूषण या हार्मोन-डिसरप्टिंग तत्वों के संपर्क जैसे कारकों को जोखिम बढ़ाने वाले संदर्भों में रखा जाता है। हालांकि, हर महिला के लिए कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य मूल्यांकन जरूरी माना जाता है।

विशेषज्ञों के नजरिए से सबसे बड़ी चुनौती यह है कि महिलाएं अक्सर अपने लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं या इलाज तक समय पर नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में जागरूकता, नियमित हेल्थ चेकअप और प्राथमिक स्तर पर स्क्रीनिंग की भूमिका बढ़ जाती है। प्राइमरी हेल्थ सिस्टम में महिलाओं के लिए किफायती और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध होना भी उतना ही जरूरी है।

कुल मिलाकर, समय से पहले मेनोपॉज के बढ़ते संकेतों और महिलाओं के इलाज में पीछे रहने की तस्वीर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती की ओर इशारा करती है। ‘स्वस्थ भारत’ के लक्ष्य के लिए महिला स्वास्थ्य पर नीतिगत फोकस, रोकथाम-आधारित देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच को प्राथमिकता देना जरूरी माना जा रहा है।

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  1. Amar UjalaAmar Ujala