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[स्वास्थ्य]

सरकार का लक्ष्य: 2025-26 तक 200 ‘डे कैंसर केयर सेंटर’; राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का बयान

राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक देश में 200 डे कैंसर केयर सेंटर खोलने का है, ताकि मरीजों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने यह भी बताया कि कई संस्थानों में ऑन्कोलॉजी विभाग सक्रिय हैं और कैंसर देखभाल का नेटवर्क विस्तार पर है।

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व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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कैंसर देखभाल को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘डे कैंसर केयर सेंटर’ मॉडल पर जोर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक देश में 200 डे कैंसर केयर सेंटर खोलने का है। इस पहल का उद्देश्य यह बताया गया कि मरीजों को बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलें और उपचार के लिए बड़े केंद्रों पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

सरकार का लक्ष्य: 2025-26 तक 200 ‘डे कैंसर केयर सेंटर’; राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का बयान
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मंत्री के बयान के मुताबिक, सरकार राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देकर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती, सुलभ और न्यायसंगत बनाने की कोशिश कर रही है। संसद में चर्चा के दौरान यह संकेत भी मिला कि आने वाले वर्षों में कैंसर केयर इंफ्रास्ट्रक्चर को जिला स्तर तक विस्तारित करने की दिशा में काम हो सकता है, जिससे शुरुआती जांच, रेफरल और फॉलो-अप सेवाएं बेहतर बनें।

डे कैंसर केयर सेंटर का मतलब क्या

‘डे केयर’ मॉडल आम तौर पर उन उपचार सेवाओं को दर्शाता है जिनमें मरीज को लंबे समय तक भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं होती। इससे मरीज और परिवार पर खर्च का बोझ कम हो सकता है, अस्पतालों में बेड-ऑक्यूपेंसी का दबाव घट सकता है, और उपचार की निरंतरता बेहतर हो सकती है। व्यवहार में, ऐसे केंद्रों में कीमोथेरेपी-डे यूनिट, बेसिक डायग्नोस्टिक्स, काउंसलिंग, और रेफरल लिंक जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई संस्थानों में ऑन्कोलॉजी विभाग मौजूद हैं और कैंसर उपचार सेवाओं का विस्तार चल रहा है। ऐसे में 200 डे कैंसर केयर सेंटर का लक्ष्य प्राथमिक स्तर और सेकेंडरी स्तर पर कैंसर केयर नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है।

मरीजों और परिवारों के लिए क्या बदलेगा

  • उपचार के लिए दूर के बड़े शहरों पर निर्भरता कम हो सकती है।
  • डे-केयर सेवाओं से समय और खर्च दोनों की बचत हो सकती है।
  • फॉलो-अप, सपोर्टिव केयर और काउंसलिंग तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
  • रेफरल सिस्टम मजबूत होने पर गंभीर मामलों का समय पर बड़े केंद्रों में ट्रांसफर संभव होगा।

यह लक्ष्य कब और कैसे पूरा होता है, यह केंद्रों की वास्तविक स्थापना, स्टाफिंग, दवाओं की उपलब्धता और राज्यों के साथ समन्वय पर निर्भर करेगा। लेकिन नीति-स्तर पर यह संकेत स्पष्ट है कि कैंसर केयर को अधिक विकेंद्रीकृत और सुलभ बनाने की दिशा में योजना आगे बढ़ रही है।

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  1. NDTV.inNDTV.in