नए अध्ययन की मांग: बजट 2026–27 से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अधिक खर्च की जरूरत
केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले आई एक अध्ययन रिपोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अधिक राशि आवंटन की आवश्यकता पर जोर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय से उठ रही मांगों को यह अध्ययन ठोस आधार देने की कोशिश करता है।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अधिक खर्च की मांग को लेकर एक नई रिपोर्ट चर्चा में है। 24 जनवरी 2026 को प्रकाशित खबर के मुताबिक, एक नए अध्ययन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ज्यादा राशि आवंटित करने की जरूरत बताई है और कहा है कि यह मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है।

रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘अधिक निवेश’ की मांग को अब शोध-आधारित तर्कों के जरिए मजबूती देने की कोशिश की जा रही है। अध्ययन का संदर्भ खास तौर पर बजट से पहले इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसी समय मंत्रालयों के आवंटन, प्राथमिकताएं और नई योजनाओं के लिए फंडिंग के फैसले लिए जाते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च क्यों एक बड़ा मुद्दा है
सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं होता। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, रोग निगरानी, आपातकालीन तैयारी, दवाओं की उपलब्धता, हेल्थ-वर्कफोर्स और लैब/डायग्नोस्टिक्स जैसी कई परतें शामिल रहती हैं। जब फंडिंग पर्याप्त नहीं होती, तो सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और समानता पर असर पड़ता है—खासकर ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में।
अध्ययन का संकेत: ‘टारगेटेड’ और ‘सस्टेनेबल’ निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन का जोर सिर्फ रकम बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को नीति-स्तर पर प्राथमिकता देने पर भी है। व्यवहारिक रूप से इसका मतलब यह हो सकता है कि फंडिंग को प्राथमिक देखभाल, रोकथाम (prevention) और प्रणालीगत मजबूती (system strengthening) की तरफ ज्यादा निर्देशित किया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं केवल बीमारी के इलाज तक सीमित न रहें।
बजट से पहले आगे क्या देखना होगा
अब नजर इस पर रहेगी कि बजट 2026–27 में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आवंटन में कितनी वृद्धि होती है, किन कार्यक्रमों पर फोकस रहता है, और क्या राज्यों/जिला-स्तर तक फंड प्रवाह, मानव संसाधन और डिलीवरी सिस्टम में ठोस सुधार के संकेत मिलते हैं। रिपोर्ट का सार यही है कि अध्ययन ने अधिक स्वास्थ्य खर्च की मांग को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।