भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत, जेपी नड्डा ने बताया ‘महत्वपूर्ण प्रगति’
25 जनवरी 2026 के आसपास आई रिपोर्ट के अनुसार ICMR और पैनासिया बायोटेक ने भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत की है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इसे डेंगू के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी प्रगति और स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम बताया।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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भारत में डेंगू के खिलाफ स्वदेशी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और पैनासिया बायोटेक ने देश की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत की है। यह चरण आमतौर पर बड़े पैमाने पर सुरक्षा और प्रभावकारिता (efficacy) की पुष्टि के लिए सबसे निर्णायक माना जाता है, क्योंकि इसमें विविध आयु-समूहों और भौगोलिक क्षेत्रों के प्रतिभागी शामिल किए जाते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस पहल को डेंगू के खिलाफ भारत की लड़ाई में महत्वपूर्ण प्रगति बताते हुए कहा कि ICMR और पैनासिया बायोटेक का सहयोग न केवल लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूत करता है। उनके मुताबिक, घरेलू स्तर पर विकसित वैक्सीन प्लेटफॉर्म भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाता है।
डेंगू भारत के कई राज्यों में हर साल मौसमी रूप से फैलने वाली बीमारी है। कई जगहों पर बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ मामले तेजी से बढ़ते हैं, जिससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में प्रभावी वैक्सीन का विकास—खासकर यदि यह घरेलू उत्पादन और सप्लाई चेन के जरिए सुलभ हो—रोकथाम की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
फेज-3 ट्रायल का उद्देश्य यह समझना होता है कि वैक्सीन वास्तविक परिस्थितियों के करीब, बड़े जनसमूह में कितनी सुरक्षित है, कितनी प्रभावी है, और किन उप-समूहों (जैसे उम्र या पूर्व संक्रमण इतिहास) में इसका असर कैसा रहता है। इस चरण से प्राप्त डेटा के आधार पर आगे नियामकीय समीक्षा, मंजूरी और फिर संभावित रोलआउट की राह बनती है।
हालांकि, ट्रायल शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि वैक्सीन तुरंत उपलब्ध हो जाएगी; इसके लिए अध्ययन पूरा होना, डेटा का विश्लेषण और नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है। फिर भी, फेज-3 की शुरुआत यह संकेत देती है कि स्वदेशी डेंगू वैक्सीन परियोजना अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में इसके नतीजों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति की नजर बनी रहेगी।