स्टडी: कोलोनोस्कोपी में AI पर बढ़ती निर्भरता से डॉक्टरों की पहचान क्षमता घट सकती है
एक स्टडी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि कोलोनोस्कोपी के दौरान AI पर अधिक निर्भरता से डॉक्टरों की बीमारी पहचानने की क्षमता घट सकती है। पोलैंड की रिसर्च में एडेनोमा पहचान दर 28% से घटकर 22% होने की बात कही गई।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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मेडिकल फील्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ कुछ नई चिंताएं भी सामने आ रही हैं। 1 सितंबर 2025 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा गया कि कोलोनोस्कोपी जैसी प्रक्रिया में AI पर अत्यधिक निर्भरता डॉक्टरों की बीमारी पहचानने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, पोलैंड की रिसर्च में यह पाया गया कि एडेनोमा (ऐसी कोशिकाएं जो कैंसरग्रस्त नहीं होतीं, लेकिन आगे जोखिम से जुड़ सकती हैं) की पहचान दर 28% से घटकर 22% हो गई। यानी कुल मिलाकर 6 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज हुई, जिसे पहचान क्षमता में लगभग 20% की कमी के रूप में भी समझाया गया है।
यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि यह संकेत देता है कि AI सहायक टूल्स, जो मूल रूप से पहचान बेहतर करने के लिए लाए जाते हैं, लंबे समय में कौशल-क्षय (skill degradation) का कारण भी बन सकते हैं—अगर मानव विशेषज्ञ का सक्रिय निरीक्षण और प्रशिक्षण समानांतर रूप से नहीं चलता।
रिपोर्ट में रिसर्च से जुड़े डॉक्टरों के बयान का संदर्भ भी दिया गया है, जिसमें कहा गया कि ये नतीजे चिंता बढ़ाने वाले हो सकते हैं क्योंकि हेल्थकेयर में AI का विस्तार बहुत तेज़ है। इससे यह बहस भी मजबूत होती है कि AI को ‘सहायक’ बनाए रखने के लिए किस तरह के गार्डरेल्स, प्रशिक्षण मानक और क्वालिटी ऑडिट जरूरी होंगे।
AI की भूमिका को लेकर व्यावहारिक दृष्टि यह हो सकती है कि डॉक्टरों के लिए निरंतर अभ्यास, केस-रिव्यू, और ऐसे प्रोटोकॉल बनाए जाएं जिनमें AI के सुझावों को आंख बंद करके स्वीकार करने के बजाय क्लिनिकल निर्णय का अंतिम नियंत्रण मानव विशेषज्ञ के पास रहे।
यह विषय इसलिए भी अहम है क्योंकि स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं में छोटी-सी चूक भी आगे चलकर मरीज की स्थिति पर असर डाल सकती है। आने वाले समय में AI आधारित हेल्थ टूल्स के साथ ‘ह्यूमन स्किल रिटेंशन’ और ट्रेनिंग सिस्टम को जोड़ना एक प्रमुख जरूरत बन सकता है।