भारत-ईयू व्यापार समझौते पर अमेरिका में नाराज़गी: ट्रंप प्रशासन के मंत्री ने यूरोप पर तीखे आरोप लगाए
भारत और यूरोपीय संघ के बीच बड़े व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मंत्री ने यूरोप पर आरोप लगाए और कहा कि यह डील अमेरिका के हितों के खिलाफ असर डाल सकती है।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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मामला क्या है
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच घोषित/प्रस्तावित बड़े व्यापारिक समझौते को लेकर अमेरिका में नाराज़गी की खबर है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस समझौते पर आपत्ति जताई और यूरोपीय पक्ष पर कड़े शब्दों में हमला बोला।

खबर में कहा गया कि समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ जैसी संज्ञा देकर इसकी व्यापकता पर जोर दिया गया है। इसमें टैरिफ कटौती, निवेश बढ़ाने और तकनीकी सहयोग जैसे बिंदुओं को शामिल किए जाने की चर्चा है।
अमेरिकी आपत्ति का तर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मंत्री का कहना है कि यूरोप रूस से सस्ता तेल खरीदने जैसे कदमों के जरिए अमेरिकी नेतृत्व वाले आर्थिक दबाव/रणनीति के अनुरूप नहीं चल रहा, और साथ ही भारत के साथ ऐसा व्यापार समझौता कर रहा है जो अमेरिकी हितों को कमजोर कर सकता है।
ऐसी बयानबाजी इस बात की ओर इशारा करती है कि वैश्विक व्यापार समझौते केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़े हैं। खासकर जब अमेरिका, यूरोप, रूस और एशिया के बीच व्यापार-शुल्क, ऊर्जा और सप्लाई-चेन की प्रतिस्पर्धा एक साथ चल रही हो।
आगे क्या देखना होगा
अब नजर इस पर रहेगी कि भारत-ईयू समझौते के औपचारिक प्रावधानों में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलती है, और अमेरिका की प्रतिक्रिया आगे किस रूप में सामने आती है—कूटनीतिक स्तर पर बातचीत, व्यापारिक दबाव, या अन्य साझेदारियों में पुनर्संतुलन।