बजट सत्र की राजनीति: आज से कार्यवाही शुरू, राष्ट्रपति के संबोधन के बाद सरकार की प्राथमिकताएं और विपक्ष के सवाल आमने-सामने
संसद के बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी 2026 से हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त संबोधन के बाद आर्थिक सर्वेक्षण और 1 फरवरी को बजट पेश होने का रास्ता खुलेगा। सत्र के दौरान सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर विपक्ष का तीखा हमला और बहस की संभावना है।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र 2026 की शुरुआत 28 जनवरी 2026 से हो गई है और इसके साथ ही राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। यह संबोधन सरकार के एजेंडे, नीतिगत रुख और आने वाले महीनों की प्राथमिकताओं का औपचारिक संकेत माना जाता है।

बजट सत्र में ‘राजनीति’ और ‘अर्थव्यवस्था’ का सबसे बड़ा संगम दिखता है, क्योंकि यहां सरकार को न केवल आर्थिक घोषणाएं करनी होती हैं, बल्कि उनके राजनीतिक अर्थ भी तुरंत सामने आने लगते हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष आमतौर पर सरकार की नीतियों, प्रदर्शन और वादों की पूर्ति पर सवाल उठाता है। इस बार भी महंगाई, रोजगार, आय असमानता, किसानों की स्थिति, राज्यों के वित्त और कल्याणकारी योजनाओं की दिशा जैसे मुद्दे बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।
बजट सत्र की टाइमलाइन भी चर्चा में है, क्योंकि 1 फरवरी 2026 को आम बजट रविवार के दिन पेश होगा, जो संसदीय इतिहास में असामान्य स्थिति मानी जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस दिन लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत करेंगी। इससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाना है, जो सरकार की आर्थिक कहानी का आधार तैयार करता है और विपक्ष को आलोचना या वैकल्पिक दलीलों का अवसर भी देता है।
इस सत्र में विधायी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक संदेशबाजी भी तेज होगी। सरकार के सामने चुनौती यह रहेगी कि वह विकास और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन दिखाए, जबकि विपक्ष बजट और नीतियों के सामाजिक प्रभावों को लेकर जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। संसद के बाहर भी दल अपने समर्थक वर्गों के लिए ‘बजट नैरेटिव’ तैयार करते हैं—किसे फायदा, किस पर बोझ और किन वर्गों के लिए राहत।
सत्र दो चरणों में चलना है—पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी 2026 तक और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित है। बीच के अंतराल में संसदीय समितियां बजट प्रस्तावों की जांच करती हैं, जिससे दूसरे चरण में बहस अधिक ठोस और तकनीकी हो जाती है।
कुल मिलाकर, 28 जनवरी 2026 से शुरू हुआ बजट सत्र नीतिगत घोषणाओं के साथ-साथ राजनीतिक टकराव का भी बड़ा मंच बनने जा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू हुई यह प्रक्रिया अगले कुछ हफ्तों में सरकार के ‘विकास-रोडमैप’ और विपक्ष के ‘जवाबदेही-सवाल’ के बीच सीधी लड़ाई की शक्ल ले सकती है।