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[राजनीति]

महबूबा मुफ्ती का संदेश: गणतंत्र दिवस ‘केवल परेड’ नहीं, संविधान के पालन की कसौटी भी

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 26 जनवरी 2026 को कहा कि गणतंत्र दिवस को सिर्फ परेड और भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह दिन संविधान के पालन और नागरिक अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता को भी दर्शाए।

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व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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मुफ्ती ने क्या कहा

26 जनवरी 2026 को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल परेड और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस दिन देश में संविधान के पालन को भी सुनिश्चित करने की भावना मजबूत होनी चाहिए।

महबूबा मुफ्ती का संदेश: गणतंत्र दिवस ‘केवल परेड’ नहीं, संविधान के पालन की कसौटी भी
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उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रीय दिवसों के अवसर पर राजनीतिक दल अक्सर लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं और शासन की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपनी-अपनी प्राथमिकताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखते हैं।

राजनीतिक संदर्भ

गणतंत्र दिवस का मूल भाव संविधान के लागू होने (26 जनवरी 1950) से जुड़ा है, इसलिए राजनीतिक बहस में ‘संवैधानिक मूल्यों’ का उल्लेख स्वाभाविक माना जाता है। मुफ्ती का बयान इसी परंपरा में एक राजनीतिक संदेश है, जिसमें वे गणतंत्र दिवस को अधिकारों और संस्थागत मजबूती के नजरिए से देखती हैं।

यह बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीति और राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श—दोनों के संदर्भ में पढ़ा जा सकता है, जहां नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा के केंद्र में रहते हैं।

आगे क्या देखना होगा

इस तरह की टिप्पणियां अक्सर प्रतीकात्मक होती हैं, लेकिन इनके जरिए पार्टियां अपने समर्थक आधार को संदेश देती हैं और सार्वजनिक विमर्श को दिशा देने की कोशिश करती हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रकार के बयानों का नीति-स्तर पर या राजनीतिक गठबंधनों/अभियानों में क्या प्रभाव पड़ता है।

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