उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण; दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के चीन दौरे से पहले तनाव बढ़ा
उत्तर कोरिया ने 2026 का पहला मिसाइल परीक्षण किया। दक्षिण कोरिया की सेना के मुताबिक कई प्रोजेक्टाइल (संभावित बैलिस्टिक मिसाइल) प्योंगयांग के पास से दागे गए। जापान ने इसे शांति और स्थिरता के लिए खतरा बताया।
- BYLINE
- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
- PUBLISHED
कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखा, जब उत्तर कोरिया ने 4 जनवरी 2026 को मिसाइल परीक्षण किया। दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 7:50 बजे प्योंगयांग के नजदीक से कई प्रोजेक्टाइल छोड़े गए, जिन्हें बैलिस्टिक मिसाइल माना जा रहा है।

घटनाक्रम का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जेइ म्यूंग कारोबारी और टेक लीडर्स के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके चीन पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही प्योंगयांग ने 2026 का यह पहला लॉन्च किया।
दक्षिण कोरियाई पक्ष के अनुसार, इन मिसाइलों ने सैकड़ों किलोमीटर की उड़ान भरी और समुद्र की दिशा में गईं। जापान ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कम-से-कम दो मिसाइलें थीं और उन्होंने इस तरह के लॉन्च को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए चुनौती के रूप में देखा।
विश्लेषकों ने इस परीक्षण के पीछे संदेश-राजनीति की ओर भी इशारा किया। चर्चा यह भी रही कि उत्तर कोरिया अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करके संभावित हमले या दबाव की स्थिति में ‘डिटरेंस’ मजबूत करना चाहता है। साथ ही, कुछ विश्लेषणों में यह संकेत दिया गया कि अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों/बयानों की पृष्ठभूमि भी इस कदम से जोड़ी जा सकती है।
इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में निगरानी और कूटनीतिक स्तर पर सतर्कता बढ़ने की संभावना है। दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा एजेंसियां आम तौर पर ऐसे मामलों में समन्वय बढ़ाती हैं, जबकि अमेरिका के साथ साझा आकलन भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
आगे यह देखना अहम होगा कि क्या यह परीक्षण श्रृंखला की शुरुआत है या एक ‘सिग्नलिंग’ कदम। दोनों ही हालात में, उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वार्ता की संभावनाएं फिर चर्चा में आ सकती हैं।