यूनियन बजट 2026: 1 फरवरी (रविवार) को BSE और NSE में होगा लाइव ट्रेडिंग सेशन, सामान्य समय के अनुसार खुलेगा बाजार
BSE और NSE ने घोषणा की है कि यूनियन बजट 2026 के दिन 1 फरवरी 2026 (रविवार) को शेयर बाजार में लाइव ट्रेडिंग होगी। सर्कुलर के मुताबिक ट्रेडिंग सामान्य समय-सीमा में चलेगी, जिससे बजट के तुरंत बाद बाजार प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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क्या ऐलान हुआ
यूनियन बजट 2026 के दिन शेयर बाजार सामान्य वर्किंग डे की तरह खुलेगा। BSE और NSE ने यह स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी 2026, जो कि रविवार है, उस दिन एक्सचेंज में लाइव ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बजट घोषणाओं के बाद बाजार की प्रतिक्रिया को उसी दिन “प्राइस-इन” होने देना और निवेशकों को तुरंत ट्रेडिंग की सुविधा देना है।

रिपोर्ट के अनुसार ट्रेडिंग एक्सचेंज की स्टैंडर्ड टाइमिंग के अनुसार होगी। यानी नियमित इक्विटी मार्केट की तरह ओपनिंग और क्लोजिंग समय में बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
बजट आमतौर पर टैक्स, खर्च, कैपेक्स, सेक्टर इंसेंटिव और नियामकीय संकेतों के जरिए बाजार को तुरंत प्रभावित करता है। रविवार को बाजार खुलने से निवेशकों को सोमवार का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उसी दिन बजट आधारित रणनीति के अनुसार पोजिशनिंग, हेजिंग और री-बैलेंसिंग संभव होगी।
हालांकि, बजट दिवस ट्रेडिंग में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो सकती है। इसलिए रिटेल निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन, स्टॉप-लॉस, और अत्यधिक लीवरेज से बचाव की जरूरत आमतौर पर ज्यादा बढ़ जाती है।
बाजार खुले रहने के पीछे लॉजिक
बजट जैसे मैक्रो इवेंट के बाद बाजार की ‘पहली प्रतिक्रिया’ अक्सर तेज होती है—कभी सकारात्मक, कभी नकारात्मक। रविवार को ट्रेडिंग होने से प्राइस डिस्कवरी जल्दी होती है, डेरिवेटिव/कैश मार्केट में नई जानकारी के हिसाब से तेजी से समायोजन होता है और कई संस्थागत निवेशक उसी दिन अपनी पोजिशन अपडेट कर पाते हैं।
इससे यह भी संभव है कि सोमवार के ओपन पर “गैप-अप/गैप-डाउन” जैसी अचानक चाल कुछ हद तक कम हो, क्योंकि प्रतिक्रिया पहले ही रविवार सेशन में आ सकती है।
क्या देखें: किन सेक्टर्स पर नजर
बजट ट्रेडिंग के दौरान आम तौर पर बैंकिंग/फाइनेंस, इंफ्रा, कैपिटल गुड्स, रेल/डिफेंस सप्लाई चेन, खपत (FMCG/ऑटो), और टैक्स-नीति से जुड़े सेक्टर्स तेज प्रतिक्रिया देते हैं। यदि बजट में टैक्स स्लैब, स्टैंडर्ड डिडक्शन, या बड़े कैपेक्स ऐलान आते हैं, तो सेक्टर रोटेशन तेजी से दिख सकता है।
निवेशक अक्सर बजट भाषण के साथ-साथ “फाइनेंस बिल” और विस्तृत डाक्यूमेंटेशन पर भी नजर रखते हैं, क्योंकि असली प्रभाव कई बार बारीक नियमों में छिपा होता है।