शेयर बाजार: सेंसेक्स 487 अंक चढ़ा, निफ्टी 25,300 के पार बंद; मेटल, मीडिया और एनर्जी शेयरों में तेजी
28 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार मजबूत नोट पर बंद हुआ। सेंसेक्स में करीब 487 अंकों की बढ़त रही और निफ्टी 25,300 के ऊपर बंद हुआ। दिन भर में सेक्टर्स के लिहाज से मीडिया, मेटल, एनर्जी/ऑयल एंड गैस और रियल्टी में बढ़त दिखी, जबकि कुछ डिफेंसिव सेगमेंट दबाव में रहे।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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28 जनवरी 2026 को भारतीय इक्विटी बाजारों में तेजी देखने को मिली और दिन के अंत में बेंचमार्क इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स में सैकड़ों अंकों की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी ने 25,300 के स्तर के ऊपर टिकते हुए क्लोजिंग दी।

क्लोजिंग: इंडेक्स ऊपर, ब्रॉडर मार्केट भी मजबूत
क्लोजिंग आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स लगभग 487 अंक चढ़कर करीब 82,345 के आसपास बंद हुआ। निफ्टी भी करीब 167 अंकों की बढ़त के साथ लगभग 25,343 के स्तर पर बंद रहा। सत्र में यह संकेत मिला कि रैली सिर्फ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं थी—मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी सकारात्मक रुझान दिखा।
बाजार में चौड़ाई (market breadth) भी सपोर्टिव रही, यानी बढ़ने वाले शेयरों की संख्या गिरने वाले शेयरों से अधिक रही। ऐसे सत्र आम तौर पर निवेशकों के जोखिम लेने के मूड (risk-on sentiment) की तरफ इशारा करते हैं, खासकर तब जब कई सेक्टर एक साथ ऊपर जाते हैं।
सेक्टर ट्रेंड: मीडिया, मेटल, एनर्जी और PSU बैंक में जोश
सेक्टर के स्तर पर मीडिया, मेटल, एनर्जी, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और PSU बैंक में 1% से 3% तक की मजबूती दर्ज हुई। यह उछाल बताता है कि बाजार में साइक्लिकल सेक्टर की तरफ रुचि बढ़ रही है—जहां मांग, कमोडिटी चक्र और सरकारी कैपेक्स जैसी थीम अक्सर ड्राइव करती हैं।
इसके उलट, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा जैसे कुछ डिफेंसिव/कंज्यूमर-ओरिएंटेड सेगमेंट दबाव में रहे। ऐसा मिश्रित सेक्टर मूव अक्सर इस बात का संकेत देता है कि निवेशक ग्रोथ-सेंसिटिव क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं और कुछ हिस्सों में मुनाफावसूली भी चल रही है।
टॉप गेनर्स-लूजर्स: किन शेयरों में ज्यादा हलचल रही
निफ्टी पर दिन के बड़े गेनर्स में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, ONGC, कोल इंडिया, हिंडाल्को जैसे नामों का उल्लेख रहा। वहीं, टाटा कंज्यूमर, एशियन पेंट्स, आयशर मोटर्स, मैक्स हेल्थकेयर और सन फार्मा जैसे शेयरों में कमजोरी दिखी।
ऐसे सत्र में निवेशक आम तौर पर सेक्टर रोटेशन (sector rotation) को समझने की कोशिश करते हैं—यानी पैसा किन सेक्टर से निकलकर किन सेक्टर में जा रहा है। अगर यह रुझान कई दिनों तक बना रहता है, तो थीम-आधारित रणनीतियां और अधिक सक्रिय हो जाती हैं।
आगे क्या देखें: बजट और ग्लोबल संकेत
अब बाजार की नजरें बजट से जुड़े संकेतों, वैश्विक रुझानों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेंगी। घरेलू स्तर पर बजट-पूर्व पोजिशनिंग अक्सर सेक्टर्स में तेज मूवमेंट ला सकती है, जबकि ग्लोबल स्तर पर ब्याज दरों और कमोडिटी कीमतों का असर सेंटिमेंट पर पड़ता है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार-सार निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।