26 जनवरी 2026 को शेयर बाजार बंद: NSE, BSE और MCX में नहीं होगी ट्रेडिंग, 27 जनवरी को खुलेगा बाजार
गणतंत्र दिवस के कारण 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को NSE और BSE पर इक्विटी, F&O, करेंसी डेरिवेटिव्स और SLB समेत सभी सेगमेंट में ट्रेडिंग बंद रहेगी। कमोडिटी बाजार (MCX) में भी सत्र नहीं होंगे। निवेशकों को पोजीशन प्लानिंग और सेटलमेंट से जुड़ी तैयारियां पहले से रखने की सलाह दी गई है।
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- व्यापार जगत न्यूज़ डेस्क
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गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय अवकाश के कारण 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा/रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर ट्रेडिंग नहीं होगी। इसका असर केवल कैश मार्केट पर नहीं, बल्कि इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O), करेंसी डेरिवेटिव्स और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) जैसे सेगमेंट पर भी पड़ेगा।

निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि यह ‘अनिवार्य’ ट्रेडिंग हॉलिडे माना जाता है, यानी कैलेंडर में पहले से तय छुट्टी। ऐसे दिन न तो प्री-ओपन सेशन होता है और न ही पोस्ट-मार्केट सेशन। इसलिए शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स, ऑप्शन स्ट्रैटेजी चलाने वाले निवेशक और हेजिंग करने वाले प्रतिभागियों को अपनी पोजीशन पहले से प्लान करनी होती है।
कमोडिटी ट्रेडिंग पर भी प्रभाव पड़ता है। रिपोर्ट में बताया गया कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी पूरे दिन कोई सत्र नहीं होगा। मतलब सोना, चांदी, कच्चा तेल, नेचुरल गैस और कृषि जिंसों में कोई कारोबार नहीं किया जा सकेगा।
छुट्टी के बाद बाजार 27 जनवरी 2026 (मंगलवार) को सामान्य समय पर फिर खुलेगा। रिपोर्ट के अनुसार प्री-ओपन 9:00 बजे शुरू होगा और नियमित ट्रेडिंग 9:15 से 3:30 बजे तक चलेगी। यह जानकारी खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो बजट, वैश्विक संकेतों या अगले कारोबारी सत्र में संभावित गैप-अप/गैप-डाउन की तैयारी करते हैं।
ऐसे अवकाश वाले दिन निवेशकों के सामने एक व्यावहारिक चुनौती यह भी होती है कि बाजार बंद होने के दौरान वैश्विक घटनाएं (जैसे अमेरिकी/यूरोपीय मार्केट मूव, जियोपॉलिटिक्स, कमोडिटी प्राइस) चलती रहती हैं। इसलिए अगले ट्रेडिंग डे पर वोलैटिलिटी बढ़ने की संभावना रहती है, खासकर जब कोई बड़ा डेटा, अंतरराष्ट्रीय खबर या नीति-संबंधी संकेत सामने आए।
कुल मिलाकर, 26 जनवरी 2026 को बाजार बंद रहने की यह सूचना केवल ‘छुट्टी’ नहीं, बल्कि ट्रेड प्लानिंग और रिस्क मैनेजमेंट का सीधा इनपुट है। जिन निवेशकों की एक्सपोजर अधिक है, वे अगले सत्र के लिए स्टॉप-लॉस, हेज या पोर्टफोलियो बैलेंसिंग जैसे कदमों पर पहले से विचार कर सकते हैं।